Bihar Election 2025 Opinion Poll Hindi

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Bihar Election 2025 Opinion Poll Hindi
Bihar Election 2025 Opinion Poll Hindi
Bihar Election 2025 Opinion Poll Hindi

Key Highlights

Here is a quick look at what the latest opinion polls say about the Bihar assembly and Bihar assembly polls.

  • The National Democratic Alliance (NDA) looks set to win a big lead, according to a recent IANS-Matrize opinion poll.
  • When it is about choosing a Chief Minister, most people say they want RJD’s Tejashwi Yadav.
  • A big thing now is Prashant Kishor getting more known and liked by people.
  • The current Chief Minister Nitish Kumar is seeing less support. People are not as happy with him these days.
  • The Grand Alliance is doing worse than the NDA in how many seats these groups may get.
  • The Jan Suraaj Party is rising as the main other option for the people, and it is trying for every seat.

Table of Contents

Introduction

The political scene in Bihar is heating up. Everyone is waiting for the 2025 Bihar assembly polls. The Election Commission of India is set to organize voting for all 243 seats in the Bihar Legislative Assembly soon. There is a lot of talk and excitement out there. Every party is building alliances and getting ready with their campaigns. People in Bihar are looking closely at every move made by the main leaders and their parties.

Early surveys show different results on who will win. The latest polls give us an idea about what is happening as the assembly election in Bihar gets near. Let’s see what these surveys and opinion polls say about the bihar assembly, bihar assembly polls, and the bihar legislative assembly.

हाल ही के बिहार चुनाव 2025 ओपिनियन पोल का सिंहावलोकन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अब राजनीति बहुत तेज हो गई है। नया ओपिनियन पोल यह दिखाता है कि राज्य में राजनीति का माहौल कैसा है। इन सर्वे में बड़ा मुकाबला एनडीए और विपक्षी grand alliance के बीच रहने वाला है। लेकिन अब इसमें कुछ नए नेता भी अपनी मौजूदगी से असर डाल रहे हैं।

इस चुनाव में, पार्टियों के अलावा मुख्यमंत्री पद भी एक बड़ा मुद्दा है। लोग यह देख रहे हैं कि क्या इस बार जो सरकार बनी है, वह सत्ता में रहेगी या फिर विपक्ष जीत जाएगा। अब, हम ताजा ओपिनियन पोल के नतीजों को देखते हैं।

2025 के ताजा ओपिनियन पोल परिणाम

IANS-Matrize ने अभी हाल ही में एक ओपिनियन पोल किया है। इसमें, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले के लिए एक संभावित नतीजा बताया गया है। इस पोल में यह कहा गया है कि एनडीए गठबंधन पूरे बहुमत से जीत सकता है। यह सर्वे उन लोगों की राय से तैयार किया गया है, जिनका नाम अंतिम voter list में है।

सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि एनडीए को 150 से 160 सीटें मिल सकती हैं। महागठबंधन को 70 से 85 सीटों पर आना पड़ सकता है। इस चुनाव में jan suraaj party को बहुत अहम माना जा रहा है। यह पार्टी दूसरे दलों के साथ मिलकर 10 से 18 सीटें जीत सकती है। jan suraaj का असर वोटों के बँटवारे पर भी देखा जा सकता है।

गठबंधन/पार्टीअनुमानित सीटेंअनुमानित वोट शेयर
एनडीए (NDA)150-16049%
महागठबंधन (MGB)70-8536%
अन्य10-1815%

प्रमुख पार्टीयों की प्रदर्शन रिपोर्ट

ओपिनियन पोल से पता चलता है कि national democratic alliance में शामिल bharatiya janata party की स्थिति काफी मजबूत है। एनडीए को चुनाव में साफ बहुमत मिलता नजर आ रहा है। इससे यह साफ होता है कि उन्होंने जिस तरह से चुनाव में काम किया है, वह सही है।

दूसरी ओर, तेजस्वी यादव ही राष्ट्रीय जनता दल और grand alliance का सबसे अहम हिस्सा है। अब इस बार, grand alliance एनडीए से बहुत पीछे है। फिर भी, तेजस्वी यादव अपनी खुद की लोकप्रियता से एक मजबूत नेता लगते हैं।

इस चुनाव में सबसे बड़ा बदलाव जन सुराज पार्टी से आ सकता है। यह एक नई पार्टी है। फिर भी, उसे करीब 15% वोट मिल सकते हैं। यह बिहार की राजनीति में एक नया और अलग असर दिखा रहा है।

बिहार विधानसभा चुनाव में कौन सी पार्टी आगे है?

अगर आप इस समय ताजा ओपिनियन पोल के आंकड़ों को देखें, तो national democratic alliance बाकी से आगे नजर आता है। इस सर्वे से लगता है कि कार्यक्रम में national democratic alliance को बहुमत से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इस वजह से, वो बाकी सभी से आगे निकल सकते हैं और खुद की सरकार बना सकते हैं।

इसके उलट, जो विपक्षी grand alliance है, वह इस समय पीछे दिखता है। चुनाव होने में अभी थोड़ा समय है और हालात बदल सकते हैं। लेकिन जो शुरुआत के संकेत हैं, वे एनडीए के लिए अच्छे हैं। आगे, हम दोनों बड़े गठबंधनों के आंकड़ों को अच्छे से देखेंगे।

एनडीए vs महागठबंधन: आंकड़ों की तुलना

आंकड़ों से यह साफ देखा जा सकता है कि national democratic alliance और opposition mahagathbandhan के बीच अब एक बड़ा अंतर है। IANS-Matrize के सर्वे के मुताबिक, national democratic alliance को लगभग 49% वोट मिल सकते हैं और उनके पास 150 से 160 सीटें आ सकती हैं। इससे उनको पूरे बहुमत का मौका मिलता है। सरकार बनाने में भी उनकी संभावना अब बहुत मजबूत है।

Bihar Election 2025 Opinion Poll Hindi
Bihar Election 2025 Opinion Poll Hindi

Grand Alliance को 36% वोट मिले हैं। इसके बाद भी, उसे सिर्फ 70 से 85 सीटें मिल सकती हैं। यह सीटें जरूरी 122 से बहुत कम हैं। इस वजह से एनडीए के नेताओं को अब ज्यादा आत्मविश्वास मिल गया है।

राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल जैसे नेता को यह लगता है कि एनडीए और महागठबंधन इस चुनाव में सीधा मुकाबला है। उनका कहना है कि लोग अब विकास से जुड़े मुद्दों पर ही वोट देने वाले हैं। ये आंकड़े भी इसी बात का यकीन दिलाते हैं।

अन्य प्रमुख दल और क्षेत्रीय दलों की स्थिति

बिहार की राजनीति में इस बार दो बड़े गठबंधन तो मौजूद हैं, लेकिन कुछ दूसरे क्षेत्रीय दल भी खूब दिख रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम prashant kishor की पार्टी jan suraaj का है। jan suraaj ने साफ-बता दिया है कि वे सभी 243 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेंगे। ओपिनियन पोल से पता चलता है कि पार्टी को करीब 15% वोट शेयर मिल रहा है। यह किसी नई पार्टी के लिए बहुत बड़ी बात है। इसका इस बार चुनाव के नतीजों पर भी असर हो सकता है।

इसके अलावा, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) एनडीए से जुड़ी है और अपनी खास जगह बना ली है। LJP (Ram Vilas) को एनडीए से 29 सीटें मिली हैं। ये सीटें गठबंधन की जीत में बहुत अहम होंगी।

इन पार्टियों का काम यह दिखाता है कि बिहार का चुनाव अब सिर्फ दो बड़े हिस्सों में नहीं बंटा है। जन सुराज जैसी नई पार्टियों के आने से, और छोटे दलों के अपनी जगह से, चुनाव अब ज्यादा रोचक हो गया है।

बिहार के अगले मुख्यमंत्री की दौड़ पर ओपिनियन पोल की राय

बिहार में अगली सरकार किसको मिलेगी, यह अभी भी एक बड़ा सवाल है. लोग अभी इस पर चर्चा कर रहे हैं कि chief minister कौन बनेगा. इस रेस में three लोग सबसे आगे हैं — तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार, और प्रशांत किशोर. सी-वोटर जैसे ओपिनियन पोल से पता चलता है कि लोग इन तीन नेताओं के बारे में क्या सोचते हैं. इससे यह भी साफ होता है कौन से नेता सबसे तेज लोकप्रिय हो रहे हैं.

Poll के नतीजे बताते हैं कि अब मुख्यमंत्री बनने की दौड़ काफी मज़ेदार हो गई है. इसमें एक नेता, जो पहले से सबको पता है, अब अपनी लोकप्रियता खो रहा है. वहीं, एक नया चेहरा है, जो बहुत जल्दी लोगों के बीच पसंद किया जाने लगा है. अब, चलो देखते हैं कि इन तीनों नेताओं को लोगों से कितना समर्थन मिल रहा है.

तेजस्वी यादव, नितीश कुमार और प्रशांत किशोर की लोकप्रियता

In the latest survey from C-Voter, RJD leader Tejashwi Yadav is seen as the most liked candidate for the Chief Minister post. About 35% of people say he is their first choice. This number shows that Tejashwi Yadav is leading in the race to be Chief Minister, even if his alliance has fewer seats.

इस सर्वे में अब जो सबसे चौंकाने वाली बात है, वह यह है कि prashant kishor पहले रणनीतिक काम करते थे, लेकिन अब वे नेता बन गए हैं। उनका नाम अब लोगों में खूब पसंद किया जा रहा है। उनकी पसंद फरवरी में जहां 14% थी, अब यह बढ़कर 23% हो गई है। अब वे दूसरे सबसे ज्यादा पसंद किए गए उम्मीदवार बन गए हैं। इसका साफ मतलब है कि उनकी “जन सुराज पदयात्रा” और जो काम उन्होंने जमीन पर किया, उस का अच्छा असर लोगों पर हुआ है।

इस समय, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता में अब बदलाव नजर आ रहा है। Survey में करीब 16% लोग उनको पसंद कर रहे हैं। इसलिए, वह तीसरे नंबर पर आ गए हैं। यह अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।

सीट-वाइज़ ब Breakdown: संभावित विजेता और करीबी मुकाबले

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी जोरों से चल रही है। हर सीट पर बड़ी बारीकी से देखा जा रहा है कि किसके जीतने की सबसे ज्यादा उम्मीद है। तेजस्वी यादव और नीतीश कुमार के बीच बहुत करीबी मुकाबला देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही, जन सुराज पार्टी, बीजेपी, और चिराग पासवान भी चुनाव को लेकर अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहे हैं। चुनावी रैलियां हो रही हैं और अब सोशल मीडिया पर भी जहां देखो, चुनाव से जुड़ी बातें तेजी से फैल रही हैं। ये सारी चीजें चुनाव के नतीजों को बदल सकती हैं और इन्हीं से तय होगा कि लोग किसके साथ जाएंगे।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से जुड़ी ख़बरें

बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे चुनाव से जुड़ी बातें भी बढ़ने लगी हैं। हर पार्टी अपनी बड़ी चुनावी रैलियों और मीटिंग्स की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां बड़ी रैली कर रहे हैं, वहीं तेजस्वी यादव भी युवा-केंद्रित कार्यक्रम से लोगों को जोड़ना चाह रहे हैं। हर कोई अपने-अपने तरीके से मतदाताओं को अपनी तरफ लाने में लगा है। इस समय सोशल मीडिया पर भी सभी लोग अलग-अलग तरीके से इसमें भाग ले रहे हैं।

इन दिनों, पार्टियों के अंदर टिकट देने को लेकर बहुत खींचतान हो रही है। इसमें से बहुत से लोग परेशान हैं। इस वजह से चुनाव के नतीजों में भी बदलवा आ सकता है। अब हम लोग चुनाव से जुड़े बड़े मुद्दों और विवादों की बात करेंगे।

बिहार चुनाव में क्या मुद्दों पर भारी जातीय गणित? जानिए

बिहार के चुनाव में जाति की राजनीति हमेशा से ही बहुत खास रही है। इस बार भी जाति सबसे बड़ी बात बन गई है। पार्टियां नेता चुनने से लेकर घोषणापत्र पर काम करने तक जाति के हिसाब से आगे बढ़ रही हैं। इसीलिए जाति का मुद्दा अभी सबसे ऊपर है। लेकिन, इस चुनाव में कुछ दूसरे मुद्दे भी देखे जा रहे हैं, जो जोर से सामने आ रहे हैं।

चुनाव आयोग ने हाल ही में voter list की special intensive revision की है। इसके बाद से एक बड़ा विवाद हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि इस process से बहुत से वोटरों के नाम हट गए। खासकर प्रवासी और अल्पसंख्यक लोगों के नाम voter list से निकाले गए हैं।

इन चुनावों में कुछ बातें हैं जो बड़ी हैं और सभी पार्टियां इन पर ध्यान रख रही हैं:

  • जाति आधारित जनगणना: अभी लगभग सभी पार्टियां इस जाति जनगणना को सपोर्ट करती हैं।
  • रोजगार और पलायन: जवानों के लिए काम देना और उन्हें राज्य से बाहर जाने से रोकना एक बड़ा चुनावी वादा है।
  • कानून व्यवस्था: “जंगल राज” का वापस आना एक बड़ा आरोप है, और इस पर जबाब भी बातचीत में शामिल है।
  • विकास और कल्याणकारी योजनाएं: सरकार अपने काम को बताना चाहती है और इन कल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी बात कर रही है।

बिहार की बहस में सृजन-शिल्पी कांड की गूंज, JDU-RJD में संग्राम, देखें

अब बिहार विधानसभा चुनाव (bihar assembly polls) में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्षी पार्टियां, खासकर RJD, कहती हैं कि इस समय की सरकार ने भ्रष्टाचार को सिस्टम में शामिल कर दिया है। तेजस्वी यादव ने कई बार सरकार की योजनाओं में हुई गड़बड़ियों के बारे में बोला है और JDU पर भी सवाल उठाए हैं।

हालांकि इस चुनाव में सृजन घोटाले जैसे पुराने मामले सीधे से चर्चा में नहीं हैं, लेकिन JDU और RJD के बीच भ्रष्टाचार पर लड़ाई बढ़ गई है। RJD इस समय सरकार की नीतियों पर सवाल उठाती है। वहीं, JDU और उसके साथ वाले दल RJD के ख़िलाफ़ उनके पुराने शासन को “जंगल राज” कहते हैं, जिस से वे कानून व्यवस्था का मुद्दा बनाते हैं।

यह लड़ाई इस बात पर रोशनी डालती है कि चुनाव सिर्फ आने वाले वादों से नहीं बंधा है। चुनाव में पिछली सरकार के काम का भी बड़ा असर रहता है, साथ ही उस पर लगे आरोपों से भी। जो लोग वोट देते हैं, उन पर यह सब असर करता है। वे इन बातों से क्या मतलब निकालते हैं, वही बात चुनाव के नतीजों में दिखेगी।

संक्षेप: बिहार विधानसभा चुनाव में पसंदीदा सीएम कैंडिडेट को लेकर सी वोटर के ओपिनियन पोल सर्वे के अक्टूबर महीने के नतीजे जारी हो गए हैं। इसमें तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर की रेटिंग में उछाल आया है तो नीतीश कुमार का ग्राफ गिरा है।

अक्टूबर में सी-वोटर के ओपिनियन पोल से बिहार के मुख्यमंत्री पद को लेकर एक नई और interesting तस्वीर सामने आई है। इस survey से यह पता चलता है कि तेजस्वी यादव, जो RJD से जुड़े हैं, अभी भी सबसे आगे the। लेकिन अब दूसरे और तीसरे नंबर पर बड़ा बदलाव हुआ है। जन सुराज से जुड़े प्रशांत किशोर को लोग बहुत पसंद करने लगे हैं। उनकी लोकप्रियता में इस समय अच्छा इजाफा हुआ है। वह अब दूसरे सबसे पसंदीदा उम्मीदार बन गए हैं।

इसके उलट, अब के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की लोकप्रियता कम हो गई है। इस बार वह इस दौड़ में तीसरे नंबर पर आ गए हैं। इससे पता चलता है कि बिहार के लोग अब कुछ नया चाहिए। अब मुख्यमंत्री बनने की यह दौड़ पहले से ज्यादा कड़ी और दिलचस्प हो गई है।

तेजस्वी की छलांग

तेजस्वी यादव इस बार बिहार के मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे हैं। सी-वोटर के सर्वे से पता चला है कि 35% लोग उन्हें सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इसका मतलब है कि वह अभी भी विपक्ष के नेता के रूप में लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। पिछले bihar assembly के चुनाव में भी तेजस्वी यादव ने अपनी पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनाया था। इस बार भी वह मजबूत उम्मीदवार हैं।

नेता तेजस्वी यादव अपनी रैलियों में युवाओं की नौकरी और उनकी परेशानियों पर बात करते हैं। वह इस वजह से युवा वोटर्स के बीच में बहुत लोकप्रिय हैं। ओपिनियन पोल में उनका गठबंधन भले ही पीछे हो, लेकिन तेजस्वी यादव की अपनी जो लोकप्रियता है, वह चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकती है।

tejashwi yadav और leader tejashwi yadav से जुड़ी बातें युवाओं और बाकी लोगों के लिए भी बहुत जरूरी हैं।

पीके की रेटिंग भी बढ़ी

प्रशांत किशोर इस बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे नया और हैरान करने वाला चेहरा हैं। वह पहले एक राजनीतिक रणनीतिकार थे। अब वह नेता बन गए। वह बहुत से लोगों को तेजी से पसंद आने लगे हैं। लोग उनकी बात से जुड़ते हैं। सी-वोटर के ओपिनियन पोल से पता चलता है कि कुछ महीनों से उनकी लोकप्रियता 14% से बढ़कर 23% हो गई है। अब वह मुख्यमंत्री की दौड़ में दूसरा सबसे बड़ा नाम हैं।

उनकी पार्टी Jan Suraaj और उनकी कई महीनों से चल रही पदयात्रा से उनके पास जमीन पर एक अच्छी पकड़ है। वह अपनी राजनीति को पुराने तरीके से अलग दिखा रहे हैं। इसकी वजह से बहुत से मतदाता अब उनकी तरफ देख रहे हैं। अगर यह आगे भी चलता रहा, तो प्रशांत किशोर कई सीटों पर जीत सकते हैं। साथ ही, वह “किंगमेकर” भी बन सकते हैं।

नीतीश का ग्राफ गिर रहा

कई साल से बिहार में राजनीति के बीच में chief minister nitish kumar रहे हैं। इस बार, यह चुनाव उन के लिए बहुत चुनौती भरा हो सकता है। एक नए opinion poll से यह बात सामने आई है कि chief minister nitish kumar की लोकप्रियता अब कम हो गई है। सी-वोटर सर्वे में केवल 16% लोगों ने chief minister nitish kumar को अपनी पहली पसंद बताया। इस वजह से वह तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के बाद तीसरे नंबर पर आए हैं।

इस बार लोगों की नाराजगी सत्ता से हो सकती है। nitish kumar ने कई बार गठबंधन बदला है, इस से उनकी छवि में फर्क आया है। फिर भी, वह एनडीए में अब भी एक अहम नेता के से देखे जाते हैं। लेकिन उनकी खुद की लोकप्रियता कम हुई है, जो चुनाव में nitish kumar और उनकी पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल बन सकती है।

चिराग और सम्राट कहां पर?

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए के लिए चिराग पासवान और सम्राट चौधरी बहुत जरूरी हैं। चिराग पासवान अपने पिता राम विलास पासवान की जगह लेकर अब आगे बढ़ रहे हैं। उनकी पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), एनडीए के साथ ही है। उन्हें गठबंधन से 29 सीटें मिली हैं। इससे यह साफ दिखता है कि वह दलित और युवाओं के वोट पाने में बड़ा हाथ बंटा सकते हैं।

बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी पार्टी के बड़े नेता हैं। वह एनडीए के चुनावी अभियान की अगुवाई कर रहे हैं। वह प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों से जुड़े हैं और, साथ ही, पार्टी को ज़मीन पर मजबूत करने में भी आगे रहते हैं। इन दोनों नेताओं का काम ही तय करेगा कि एनडीए जीतेगा या हारेगा।

ओपिनयन पोल में किसको लगा झटका?

ताजा opinion poll से एक बड़ा असर दिखता है। यह असर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर और उनकी पार्टी पर है। उनके लिए लोगों की पसंद कम हो गई है। यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव बन गया है। पहले नीतीश कुमार को ‘सुशासन बाबू’ के नाम से जाना जाता था। अब वह सबसे पसंदीदा नेताओं में तीसरे नंबर पर आ गए हैं। यह बात अब लोगों के लिए बड़ी मानी जा रही है।

विपक्षी महागठबंधन को अब दूसरा झटका मिलता है। अगर आप सीटों का अनुमान देखें तो वे एनडीए से बहुत पीछे हो गए। इस समय तेजस्वी यादव सीएम बनने की दौड़ में आगे हैं। लेकिन उनका गठबंधन अभी भी बहुमत से दूर है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वे आने वाले कुछ हफ्तों में यह अंतर कुछ कम कर पाएंगे?

90 हजार से अधिक बनाए गए मतदान केंद्र

बिहार एक बड़ा राज्य है। यहां पर स्वतंत्र और बिना पक्षपात चुनाव कराना बहुत ही कठिन काम है। चुनाव आयोग (Election Commission of India) इस काम के लिए हर समय पूरी तरह से तैयार रहता है। अंतिम मतदाता सूची (voter list) के अनुसार, राज्य में 7.42 करोड़ से ज्यादा वोटर हैं। इन सभी लोगों तक संदेश पहुंचाने और चुनाव सही से कराने के लिए, चुनाव आयोग (Election Commission) ने एक अच्छी व्यवस्था बनाई है।

राज्य में हजारों मतदान केंद्र बनाए जा रहे हैं। इसका मकसद यह है कि लोग आसानी से वोट कर सकें। चुनाव की घोषणा के बाद ही सही आंकड़ा मिल पाएगा। माना जा रहा है, यहां 90,000 से ज्यादा मतदान केंद्र होंगे। चुनाव आयोग यह देखने में लगा है कि वोटिंग का तरीका ठीक से हो। वह चाहता है, यह सब सुर‌क्षित हो और बिना गड़बड़ के पूरा किया जाए।

प्रश्न: क्या एग्ज़िट पोल कानूनी रूप से नियंत्रित हैं?

Yes, in India, exit polls are managed by law. The Election Commission of India watches this closely. This is to make sure exit polls do not affect how fair the voting is. According to Section 126A of the Representation of the People Act, 1951, you cannot show or share exit poll results when the election is going on.

जब से मतदान शुरू होता है, तब से यह प्रतिबंध लागू हो जाता है। यह हर चरण की वोटिंग पूरी होने के आधे घंटे बाद तक जारी रहता है। इसका मतलब यह है कि bihar assembly या bihar assembly polls में, जब तक आखिरी दौर की वोटिंग पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी मीडिया एजेंसी या हाउस एग्जिट पोल का रिजल्ट नहीं दिखा सकता है। अगर कोई इस नियम को नहीं मानता, तो उस पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 एग्ज़िट पोल से जुड़े FAQs

People use opinion polls to try to know what voters feel before an election. At the same time, exit polls guess the results after voting is over. Many people also ask questions about exit polls for the Bihar assembly polls.

एग्जिट पोल कैसे किए जाते हैं? क्या आप इन पर भरोसा कर सकते हो? यह ओपिनियन पोल से अलग कैसे होते हैं? नीचे आपको कुछ आम सवालों के जवाब मिलेंगे. इससे आप एग्जिट पोल की भूमिका को और अच्छे से समझ पाएंगे.

बिहार चुनाव में जातीय समीकरण साधने अपने-अपने दांव, कौन होगा कामयाब?

बिहार में जो विधानसभा चुनाव होते हैं, वह हमेशा जाति से जुड़े होते हैं। इस बार भी, सभी दल जाति से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं। चुनाव के लिए जो उम्मीदवार चुने गए हैं, उनमें जाति को बहुत देखा गया है। उनके जो घोषणापत्र हैं, उनमें अलग-अलग जातियों से जुड़े लोगों को लुभाने के लिए कई बातें बोली गई हैं।

विपक्ष ने विवादित voter list को बदलने की प्रक्रिया को जाति और समुदाय से जोड़ दिया है। इससे मामला अब ज्यादा बढ़ गया है। चुनाव में पार्टियां अपने तरीके से जाति को लेकर वोट जोड़ने और घटाने में लगी हैं।

  • उम्मीदवारों का चयन: हर सीट पर उम्मीदवार का चुनाव उस जगह से हो रहा है, जिस जगह उसकी जाति के लोग ज्यादा हैं।
  • ओबीसी, दलित और सवर्ण वोट: पार्टियां ओबीसी, दलित, और सवर्ण वोट लाने के लिए अलग तरीके से काम कर रही हैं।
  • जातिगत जनगणना: लगभग हर पार्टी ने कहा है कि वे जातियों की गिनती करवाएंगे।
  • नेताओं के बयान: नेता रैलियों में जाकर कई जातियों से जुड़े लोगों से मिल रहे हैं।

It will be good to see who will win this game.

Conclusion

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से जुड़े ओपिनियन पोल से यह पता चलता है कि अब वहां की राजनीति में बदाव आ रहे हैं। तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर की पसंद लोगों के बीच हर दिन बढ़ रही है। इससे साफ दिखता है कि वोट करने वाले लोग अब अपना मन बदल सकते हैं। नीतीश कुमार की ताकत अब पहले से कम हो गई है। इस चुनाव में सिर्फ आंकड़ों से बात नहीं बनेगी। वहां गांव-शहर के लोग मुद्दे और जाति से जुड़ी बातें भी देखेंगे। जो पार्टी सभी लोगों की भावनाओं को समझ पाएगी, वही जीत के और करीब होगी। अगर आपने इन पूरे बदलावों पर ध्यान देना है और और चुनाव से जुड़ी ऐसी हर नई खबर जानना चाहते हो, तो हमें जरूर फॉलो करें।

Frequently Asked Questions

क्या ओपिनियन पोल बिहार चुनाव में चौंकाने वाले रुझान दिखा रहे हैं?

Yes, opinion polls are showing some new things. The biggest surprise is that Prashant Kishor is getting more popular. This makes him a strong choice for chief minister. The grand alliance is also falling behind in the number of seats. But, their leader Tejashwi Yadav is still liked by people.

बिहार में एग्जिट पोल्स क्या सुझाव देते हैं?

अभी तक बिहार विधानसभा चुनाव के लिए एग्जिट पोल्स जारी नहीं हुए हैं। ये पोल्स सिर्फ जब सारे चरणों का मतदान खत्म हो जाएगा, उसके बाद जारी होंगे। इस समय, जो ओपिनियन पोल्स हैं, वो दिखाते हैं कि national democratic alliance को महागठबंधन से साफ बढ़त वाली स्थिति में रखा गया है।

ताजा ओपिनियन पोल में उम्मीदवारों को लेकर क्या अनुमान हैं?

नए ओपिनियन पोल से यह बात सामने आई है कि मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज्यादा लोग तेजस्वी यादव को पसंद करते हैं। तेजस्वी यादव को 35% लोगों से समर्थन मिला है। उनके बाद प्रशांत किशोर आते हैं, जिन्हें 23% लोगों से समर्थन मिला है। अभी के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 16% लोग पसंद करते हैं।

यह पोल तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार और प्रशांत किशोर के नाम को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा में है।

Who will win the next Bihar state assembly elections in 2025?

Recent opinion polls for the bihar assembly show that the NDA, which includes the BJP and its partners, could win more seats than the grand alliance, led by the RJD. But these are just predictions. The real winner of the bihar assembly polls will be known after the vote count.

Who is leading the race for Bihar Chief Minister as per the current opinion polls?

The latest opinion polls show that Tejashwi Yadav from RJD is ahead. Most people want him to be the next Chief Minister of Bihar. Prashant Kishor, with Jan Suraaj party, comes in second place and he has more support now. Chief Minister Nitish Kumar is in third place, with fewer people liking him for the job of Chief Minister.

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Bihar Elections Nitish: What Exit Polls Predict for 2025
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